विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव | Privilege Motion



चर्चा में क्यों?

हाल ही कांग्रेस के 81 विधायकों के इस्तीफों का  मामला राजस्थान हाई कोर्ट में ले जाने पर उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था।

विशेषाधिकार प्रश्न (Privilege Motion) क्या होता है?

जब राजस्थान विधानसभा में किसी सदस्य के या सदन के या सदन की किसी समिति के विशेषाधिकारों का हनन होता है, उस स्थिति में राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 157 के आधार पर विधानसभा का कोई भी सदस्य विधानसभा अध्यक्ष की सहमति से विशेषाधिकार प्रश्न पूछ सकता है।

विशेषाधिकार प्रश्न की सूचना किसे देनी होती है?

जब राजस्थान विधानसभा का कोई सदस्य विशेषाधिकार प्रश्न पूछना चाहे, उस स्थिति में राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 158 के आधार पर उसे इसकी सूचना लिखित में जिस दिन प्रश्न पूछना हो, उसकी बैठक से पूर्व सचिव, विधानसभा को देनी होती है। यदि पूछें जाने वाला प्रश्न किसी दस्तावेज से सम्बंधित है तो उसे सूचना के साथ वह दस्तावेज भी संलग्न करना होता है।

विशेषाधिकार प्रश्न पूछने के अधिकार की शर्तें क्या है?

राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 159 के आधार पर राजस्थान विधानसभा के सदस्य को निम्न शर्तो के आधार पर प्रश्न पूछने का अधिकार है-
(1). सदन में पूछे जाने वाला विशेषाधिकार प्रश्न हाल में ही घटित किसी विशिष्ठ विषय तक सीमित हो।

(2). विषय मे सदन का हस्तक्षेप हो।

विशेषाधिकार प्रश्न कैसे पूछते है?

(1). विधानसभा अध्यक्ष यदि नियम 157 के अंतर्गत पूछें जाने वाले प्रश्न की सहमति दे देता है और निश्चित कर लेता है कि यह नियम अनुकूल है, उस स्थिति में नियम 160 के अनुसार वह सम्बन्धित सदस्य को प्रश्नों के बाद और कार्यसूची का कार्य प्रारम्भ करने से पहले सदन में पुकारता है तथा सम्बन्धित सदस्य अपने स्थान पर खड़ा होकर विशेषाधिकार प्रश्न उठाने की अनुमति मांगता है और उसका संक्षिप्त परिचय देता है।

लेकिन यदि विधानसभा अध्यक्ष पूछे जाने वाले विशेषाधिकार प्रश्न के प्रति सहमति देने से इंकार कर देता है तथा अध्यक्ष की राय में चर्चा के लिए नियम अनुकूल नही है। उस स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष को अगर आवश्यक लगे तो वह सदन को अवगत करा सकता है कि वह विशेषाधिकार प्रश्न के प्रति सहमति देने से इंकार करता है और यह नियमानुकूल नही है।

परन्तु यदि विधानसभा अध्यक्ष को विषय की अविलंबनियता के सम्बंध में समाधान हो जाये तो प्रश्नों के निपटाने के पश्चात बैठक के दौरान किसी भी समय विशेषाधिकार प्रश्न उठाये जाने की अनुमति दे सकता है।

(2) यदि विशेषाधिकार प्रश्न पर अनुमति दिए जाने के पश्चात सदन के किसी सदस्य/सदस्यों को आपत्ति हो तो उस स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष प्रश्न को अनुमति दिए जाने के पक्ष में सदस्यों को अपने स्थान पर खड़े होने के लिए कहता है। तदनुसार यदि न्यूनतम 10 सदस्य खड़े होते है तो अध्यक्ष सदन को सूचित करता है कि प्रश्न को अनुमति दी जाती है। इसके विपरीत यदि 10 से कम सदस्य खड़े होते है तो अध्यक्ष सदस्य को सूचित करता है कि उसे सदन की अनुमति नही है।


विशेषाधिकार प्रश्न पर सदन या समिति द्वारा विचार करना:-

नियम 160 के अनुसार प्रश्न को अनुमति दिए जाने के पश्चात सदन प्रश्न पर विचार कर सकता है और विनिश्चय कर सकता है या प्रश्न उठाने वाले सदस्य या अन्य सदस्य के प्रस्ताव पर विशेषाधिकार समिति को निर्दिष्ट कर सकता है।

अध्यक्ष द्वारा विशेषाधिकार प्रश्न को समिति को सौंपना:-

नियम 162 के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष किसी भी विशेषाधिकार प्रश्न को जांच, अनुसंधान या प्रतिवेदन के लिए विशेषाधिकार समिति को सौंप सकता है।

अध्यक्ष को निर्देश देने की शक्ति:-

नियम 163 के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष को आवश्यक लगे तो वह विशेषाधिकार समिति में या सदन में विशेषाधिकार प्रश्न पर विचार से सम्बंधित सभी विषयों के बारे में प्रक्रिया के विनियम बनाने के लिए निर्देश दे सकता है।