चर्चा में क्यों?
हाल ही पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के स्थायी अध्यक्ष राजस्थान के राज्यपाल श्री कलराज मिश्र द्वारा निर्णय लिया गया है कि कोमल कोठारी स्मृति (लाइफ टाइम अचीवमेंट) लोक कला पुरुस्कार की राशि ढाई लाख एक से अधिक लोगों को दिए जाने पर, अब बांट कर नही दी जायेगी। यदि दो कलाकारों को यह सम्मान दिया जायेगा तो दोनों को ढाई-ढाई लाख रुपये की राशि दी जायेगी।
पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र
उत्तर क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना की घोषणा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा 23 मार्च 1985 में पंजाब के हुसैनीवाला में की गयी। उसके पश्चात सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय के संस्कृति विभाग द्वारा 7वीं पंचवर्षीय योजना में वर्ष 1985-86 में सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र स्थापित किये गये । ये हैं-
1. उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, पटियाला
2. पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर
3. दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, तंजावूर
4. दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर
5. पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, कोलकाता
6. उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, इलाहाबाद
7. उत्तर पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, दीमापुर
इनमें से राजस्थान में "पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र" उदयपुर में स्थापित किया गया।
सदस्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमण, दीव, दादरा नागर हवेली।
कार्यालय :- उदयपुर मे पिछोला झील के किनारे स्थित प्राचीन व ऐतिहासिक बागोर की हवेली में है।
• बागोर की हवेली का निर्माण मेवाड़ के पूर्व प्रधानमंत्री अमर चंद बड़वा ने करवाया था।
• यह एक रजिस्टर्ड सोसायटी है। जिसका संचालन परिषद के स्थायी अध्यक्ष राजस्थान के राज्यपाल द्वारा किया जाता है। वर्तमान में पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के स्थायी अध्यक्ष श्री कलराज मिश्र है।
स्थापना का उद्देश्य
• भारतीय संस्कृति के रचनात्मक विकास और देश मे सांस्कृतिक भावना का निर्माण करना।• ललित कला, नृत्य, नाटक, संगीत, रंगमंच, शिल्प और रचना अभिव्यक्ति के सभी प्रकारों को प्रेरित करना व बढ़ावा देना।
• कलाकारों को प्रदर्शन हेतु अवसर उपलब्ध करवाना।
• भारत के पश्चिमी प्रान्तों की की समृद्ध कला व सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण, संवर्धन और प्रोत्साहन करना।
• देश के विभिन्न अंचलों की विलुप्त होती कला और शिल्प शैलियों को प्रलेखन व प्रदर्शन के माध्यम से पुन: प्राणदान बनाने तथा नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का कार्य।
प्रशासनिक व्यवस्था:-
• प्रशासनिक कार्यों हेतु इसमें भारत सरकार द्वारा नामांकित व्यक्ति जो संस्कृति मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद से कम का न हो, होता है।
• राज्य सरकार से एक नामांकित व्यक्ति व विभिन्न कला विषयों में प्रतिष्ठित व्यक्ति होता है।
पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की योजनाएं
1. राष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान - प्रदान कार्यक्रम (National Cultural Exchange programme - NEEP)
• उद्देश्य :- आर्टिस्ट, शिल्पकारों, चित्रकारो, मूर्तिकारो का आदान-प्रदान करना।
• सांस्कृतिक आदान- प्रदान करना व देश की अखण्डता सुनिश्चित करना।
2. गुरु-शिष्य परम्परा
• प्रारंभ:- 1990-91 मे।
• उद्देश्य:- भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं को
संरक्षित करना व बढ़ावा देना।
• क्रियान्वयन :- क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा।
• वित्तीय सहायता :-
गुरु :- 5000/- प्रति माह।
संगतकार:- 2500/- प्रति माह।
विद्यार्थी:- 1000/- प्रति माह।
3. रंगमंच कायाकल्प योजना
4. युवा प्रतिभाशाली कलाकार योजना
5. दस्तावेज़ीकरण
6. उत्तर पूर्व क्षेत्रों का ऑक्टेव कार्यक्रम
डॉ. कोमल कोठारी स्मृति (लाइफ टाइम अचीवमेंट) लोक कला पुरुस्कार :-
• पहली बार पुरुस्कार देने की घोषणा 21 दिसंबर 2016 को की गई।
• प्रथम बार पुरुस्कार 2017 से देना प्रारंभ किया गया।
• यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 21 दिसंबर को शिल्पग्राम उत्सव के उदघाटन समारोह में पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा दिया जाता है।
• पुरुस्कार राशि :- 2.51 लाख, शॉल, रजत पत्रिका।
• केवल भारतीय व्यक्ति 'व संस्था को ही पुरुस्कार दिया जाता है।
• राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमण, दीव, दादरा, नागरा हवेली की लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन व परिवर्धन को बढ़ावा देने वाले जीवित, भारतीय व्यक्ति, जिसकी आयु 45 वर्ष से अधिक हो, को प्रदान किया जाता है।
• संस्था श्रेणी मे वह संस्था जिसकी पंजीकरण अवधि 10 वर्ष हो तथा कम से कम 10 वर्ष से पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के सदस्य राज्यों में प्रदेश की लोक कलाओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में सक्रिय योगदान दिया हो।
• व्यक्ति की दशा में, उस व्यक्ति द्वारा किये गये कार्य पर पुरस्कार नही दिया जाता है, जिसका निधन हो गया हो। लेकिन पुरस्कार समिति को आवेदन अथवा प्रस्ताव भेजे जाने के उपरान्त यदि ऐसे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसे मरणोपरान्त पुरस्कार दिया जाता है।
• समिति को प्राप्त कोई भी आवेदन/प्रस्ताव यदि सम्मान योग्य चयन के लिए नही है तो, उस वर्ष के लिए पुरुस्कार नही देने के लिए पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र स्वतंत्र है।
• पूर्व में पुरुस्कार राशि समान रूप से सम्मान प्राप्त करने के हकदार वाले व्यक्ति /संघ/संगठन मे बांटी जाती थी। लेकिन दिनांक 29 जनवरी 2002 से उसे परिवर्तित का दिया गया है। अब पुरुस्कार की राशि ढाई लाख एक से अधिक लोगों को दिए जाने पर, बांट कर नही दी जायेगी। यदि दो कलाकारों को यह सम्मान दिया जायेगा तो दोनों को ढाई-ढाई लाख रुपये की राशि दी जायेगी।
• वर्ष 2022 का पुरस्कार जयपुर के तमाशा शैली के साधक " दिलीप भट्ट" को दिया गया। यह दिवगंत कलाकार गौपी भट्ट के पुत्र है।
डॉ. कोमल कोठारी एक परिचय
• इनका जन्म 4 मार्च 1929 को जोधपुर में हुआ।
• श्री विजयदान देथा के साथ मिलकर "प्रेरणा" नामक पत्रिका शुरु की।
• इन्ही के प्रयासों से लंगा मंगणियार संगीत को पहली बार अन्तराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
• इन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 1983 में पदम् श्री व वर्ष 2004 में पदम् भूषण दिया गया।
• राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान रत्न से भी सम्मानित किया गया।
• कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 1989 में इनका बनाया गया वृतचित्र "कोमलदा" के नाम से संरक्षित हैं।
• इन्हें 'कोमल दा' के नाम से भी जाना जाता है।
• इन्होने बोरुंदा मे वर्ष 1964 में रूपायन संस्था की स्थापना की थी।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य:-
• वर्ष 2023 का "फेस्टिवल ऑफ द नॉर्थ ईस्ट ऑक्टेव" का आयोजन गोवा में किया जायेगा।
• वर्तमान में पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की निदेशक किरण सोनी गुप्ता है।
• शिल्पग्राम उत्सव :- उदयपुर । (प्रत्येक वर्ष दिसम्बर माह के अंतिम सप्ताह में 10 दिन का आयोजन)। शिल्पग्राम की स्थापना 1989 में की गई। यहां 31 झोपड़ियां है।
• बसंत उत्सव :- गुजरात।
• लोक रंग उत्सव :- महाराष्ट्र।
• लोकोत्सव :- गोवा।
• 1989 मे शिल्पग्राम की स्थापना।
• राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव - 2023 बीकानेर में आयोजित किया जायेगा।
