हृदय योजना | HRIDAY Scheme | National Haritage City Development and Augmentation Yojana


हृदय योजना (राष्ट्रीय विरासत शहर विकास व संवर्धन योजना)

National Haritage City Development and Augmentation Yojana (HRIDAY)

HRIDAY Scheme


प्रारंभ:-

21 जनवरी 2015 को (केन्द्रीय क्षेत्र की योजना )

सम्मिलित शहर:-

12 (अजमेर, अमरावती. अमृतसर, वाराणसी, वेलंकनी वारंगल, कांचीपुरम, मथुरा, पुरी, बादामी, द्वारका, गया)

समाप्त:-

31 मार्च 2019 को।

परियोजना की अवधि:-

दिसंबर 2014 से शुरू होकर 4 वर्ष तक (21 जनवरी 2015 से 31 मार्च 2019 तक)।


बजट आवंटन:-

500 करोड़ रुपये।

उद्देश्य:-

(1). हेरिटेज सिटी के समग्र विकास पर ध्यान केन्द्रित करना।

(2). सुंदरतापूर्ण, सुलभ, शिक्षाप्रद और सुरक्षित वातावरण को प्रोत्साहित करके शहर के अद्वितीय चरित्र को प्रतिबिंबित करने के लिए विरासत शहर की विशिष्ता को संरक्षित एवं पुनर्जीवित करना।

(3). शहरी नियोजन और समावेशी तरीके से आर्थिक विकास करना।

(4). 'विरासत संवेदनशील बुनियादी ढांचे' की योजना बनाकर विकास करना एवं कार्यान्वयन करना।

(5). विरासत आधारित उद्योगो की क्षमता का विकास करना।

(6). शहरी विरासत के अनुकूल पुनर्वास और रखरखाव करना।

(7). ऐतिहासिक इमारतो की रेट्रोफिटिंग के लिए उपयुक्त तकनीकों को विकसित करना है।

(8). सार्वजनिक निजी सहभागिता की स्थापना करना व प्रबंधन करना।

(9). विरासत शहरों तक बौद्धिक व आध्यात्मिक पहुंच बढ़ाने के लिए आधुनिक ICT उपकरणों के उपयोग से शहरों को सूचनात्मक बनाना तथा उन्हें आधुनिक निगरानी और सुरक्षा उपकरण जैसे CCTV आदि से युक्त करना।

नोडल मंत्रालय:-

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय।

वित्त पोषण:-

केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत।

चार विषयगत क्षेत्रों (Theme Areas) पर केन्द्रित:-

भौतिक अवसंरचना, संस्थागत अवसंरचना, आर्थिक अवसंरचना, सामाजिक अवसंरचना।

प्रमुख बिन्दु:-

योजना मे अजमेर शहर को 40.04 करोड रुपये बजट आवंटित किया गया था। सर्वाधिक बजट वाराणसी शहर को 89.31 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था।

• इस योजना ने मूल विरासत से संबद्ध नागरिक अवसंरचना परियोजनाओं के विकास का समर्थन किया है।

• इसमे शहरो की विरासत, धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संपत्तियों के आसपास के क्षेत्रो के लिए शहरी अवसंरचना का पुनरुद्धार एवं जलापूर्ति, स्वच्छता, जल निकासी अपशिष्ठ, प्रबंधन आदि का विकास भी शामिल है।

• इस योजना में राजस्थान का एक मात्र शहर अजमेर है।

• अजमेर शहर को प्रसाद योजनान्तर्गत भी शामिल किया गया है।

• राष्ट्रीय शहरी मामलो का संस्थान (NIUA) (National Institute of Urban Affairs) को योजना के लिए राष्ट्रीय परियोजना प्रबंधन इकाई (National Project Management Unit) बनाया गया है। जोकि मिशन निदेशालय के सचिवालय के रूप मे कार्य करता है एवं मिशन निदेशालय की सिफारिश पर कार्यकारी एजेंसी को धनराशि आवंटित की जाती है।

• राष्ट्रीय मिशन निदेशालय का अध्यक्ष संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी होता है। जो मिशन निदेशक के रूप मे कार्य करता है।

• योजनान्तर्गत HMP/DPR राष्ट्रीय/ शहरी मिशन निदेशालय, लोक निर्माण संगठन या विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा तैयार की जाती है।

• राष्ट्रीय मिशन निदेशालय द्वारा शहरी परियोजना प्रबंधन इकाई (City PMU) स्थापित की जाती है। जो कि शहरी मिशन निदेशालय के सचिवालय के रूप मे कार्य करता है।

• शहरी मिशन निदेशालय का अध्यक्ष मुख्य कार्यपालक अधिकारी / नगर निगम आयुक्त के स्तर मे कम का नहीं होता है।

• शहरी मिशन निदेशालय की सहायता हेतु शहर स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) होती है। जो परियोजनाओ को पूरा करने के लिए राज्य व कार्यकारी एजेंसियों के मध्य समन्वयन का कार्य करती है।

• राष्ट्रीय स्तर पर हृदय - राष्ट्रीय अधिकार प्राप्त समिति (HNEC) (HRIDAYA National Empowered Committee) का गठन किया गया। उस समिति की सहअध्यक्षता शहरी विकास मंत्रालय के सचिव और संबधित राज्यों के मुख्य सचिव द्वारा की जाती है। HNEC का मुख्य कार्य योजना की समग्र स्वीकृति, अनुमोदन, मार्गदर्शन और योजना के लिए सलाहकार भूमिका निभाना है।

• शहरी स्थानीय निकाय स्तर पर योजना मे किये गये कार्य के निरीक्षण, समीक्षा व निगरानी करने हेतु शहरी स्थानीय निकाय स्तर पर "सलाहकार और निगरानी समिति" का गठन किया गया है। कार्यान्वयन साधनों मे जब आवश्यक हो, यह समिति "मिड कोर्स" सुधार की अनुशंसा कर सकती है।

योजना के घटकों की व्यापक सांकेतिक सूची:-

• विरासत प्रबंधन योजना बनाने हेतु मूर्त एवं अमूर्त विरासत परिसंपत्तियो की सूची बनाकर रिकार्डिंग व दस्तावेजीकरण करना तथा GIS आधारित मानचित्रण करना है।

• ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत स्थलों का पुनरुदार एवं संरक्षण करना तथा सांस्कृतिक स्थलों का विकास करना साथ ही इन स्थलो को सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे मैले, त्योहार आदि द्वारा सेवा प्रावधानों के साथ जोड़ना है।

• विरासत प्रबंधन योजना में ज्ञान प्रबंधन हेतु वेबसाइटों का निर्माण करना, शहर के नक्शे, केटलॉग, ब्रोशर, डिजिटल डिस्पले बोर्ड, दिशा स्तंभ, डिजिटल सूचना केन्द्र, वाई-फाई एक्सेस जोन आदि का विकास करना है साथ ही टूर ऑपरेटरो, गाइडो, स्थानीय कलाकारो, महिला उद्यमियों का कौशल विकास करना भी है।

योजना के अन्तर्गत MoA समझोता :-

(1). त्रिपक्षीय समझौता:- यह ULB, राज्यों व शहरी विकास मंत्रालय के मध्य होता है। जिसमें प्रोजेक्ट से सम्बंधित व्यापक रूपरेखा व प्रत्येक पक्ष के दायित्वों को निर्धारित किया जाता है।

(2). द्विपक्षीय समझौता:- यह कार्यकारी एजेन्सी व राष्ट्रीय मिशन निदेशालय के मध्य होता है। इसमें कार्य का प्रकार, किये जाने वाले कार्य व उसके भुगतान से संबंधित नियम व शर्तों का उल्लेख होता है।

शहरी विकास मंत्रालय द्वारा कार्यकारी एजेसियों को भुगतान निम्न प्रकार से किया जाता है:-


पहली किस्त - परियोजना के अनुमोदन दर :- 20% राशि।

दूसरी किस्त - परियोजना की 20% Physical and Financial Progress पर :- 60% राशि।

तीसरी क़िस्त - परियोजना की 60% Physical and Financial Progress पर :- 20% राशि।
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