• मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम कौनसा है - 1993।
• इस अधिनियम की धारा 21 में मानवाधिकार आयोग के गठन का प्रावधान है।
• 18 जनवरी 1999 को अधिसूचना जारी कर 20 मार्च 2000 को आयोग की स्थापना की गई।
• राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग विनियम-2001 है।
आयोग में सदस्यों की संख्या
• प्रारंभ में 1 अध्यक्ष +4 सदस्य ।
• वर्तमान में 1 अध्यक्ष+ 2 सदस्य। (मानव अधिकार संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2006 के अनुसार)।
• वर्तमान अध्यक्ष - गोपाल कृष्ण व्यास है। यह आकाशवाणी बीकानेर से उद्घोषक, लोक गायक व नाट्य कलाकार के रूप मे जुड़े रहे तथा राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश भी रहे है।
• सदस्य (1.) महेश गोयल, इन्होंने आयोग में पदभार 25.01.2021 को ग्रहण किया। यह पूर्व IPS भी रहे है। राजस्थान न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष के रूप मे मनोनित रहे है। वर्ष 2000 में राष्ट्रपति द्वारा उल्लेखनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक प्रदान किया गया था। इन्होने बज्जु (जिला बीकानेर) में भारत पाक सीमा पर पाकिस्तान से तस्करी कर लए गए हथियारो और गोला बारूद की सबसे बडी खेप जब्त की और लगभग 50 आरोपियो को गिरफ्तार किया।
• सदस्य (2.) राम सिंह झाला ।
आयोग का मुख्य कार्य- राज्य में मानव अधिकारों की रक्षा हेतु एक निगरानी संस्था के रूप मे कार्य करना।
• संयुक्त राष्ट्र के चार्टर 10 दिसम्बर 1948 में मानव अधिकारों को पारिभाषित कर सम्मिलित किया गया है।
• आयोग का सचिव राज्य सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी से कम स्तर का अधिकारी नही हो सकता है। वर्तमान में यज्ञमित्र सिंह देव आयोग के सचिव है।
• आयोग की अन्वेषण एजेंसी में वह पुलिस अधिकारी होता है जो महानिरीक्षक पुलिस के पद से कम स्तर का नही हो। वर्तमान में प्रशाखा माथुर है।
• इस अधिनियम की धारा 21 में मानवाधिकार आयोग के गठन का प्रावधान है।
• 18 जनवरी 1999 को अधिसूचना जारी कर 20 मार्च 2000 को आयोग की स्थापना की गई।
• राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग विनियम-2001 है।
आयोग में सदस्यों की संख्या
• प्रारंभ में 1 अध्यक्ष +4 सदस्य ।
• वर्तमान में 1 अध्यक्ष+ 2 सदस्य। (मानव अधिकार संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2006 के अनुसार)।
• वर्तमान अध्यक्ष - गोपाल कृष्ण व्यास है। यह आकाशवाणी बीकानेर से उद्घोषक, लोक गायक व नाट्य कलाकार के रूप मे जुड़े रहे तथा राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश भी रहे है।
• सदस्य (1.) महेश गोयल, इन्होंने आयोग में पदभार 25.01.2021 को ग्रहण किया। यह पूर्व IPS भी रहे है। राजस्थान न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष के रूप मे मनोनित रहे है। वर्ष 2000 में राष्ट्रपति द्वारा उल्लेखनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक प्रदान किया गया था। इन्होने बज्जु (जिला बीकानेर) में भारत पाक सीमा पर पाकिस्तान से तस्करी कर लए गए हथियारो और गोला बारूद की सबसे बडी खेप जब्त की और लगभग 50 आरोपियो को गिरफ्तार किया।
• सदस्य (2.) राम सिंह झाला ।
आयोग का मुख्य कार्य- राज्य में मानव अधिकारों की रक्षा हेतु एक निगरानी संस्था के रूप मे कार्य करना।
• संयुक्त राष्ट्र के चार्टर 10 दिसम्बर 1948 में मानव अधिकारों को पारिभाषित कर सम्मिलित किया गया है।
• आयोग का सचिव राज्य सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी से कम स्तर का अधिकारी नही हो सकता है। वर्तमान में यज्ञमित्र सिंह देव आयोग के सचिव है।
• आयोग की अन्वेषण एजेंसी में वह पुलिस अधिकारी होता है जो महानिरीक्षक पुलिस के पद से कम स्तर का नही हो। वर्तमान में प्रशाखा माथुर है।
नियुक्ति:- राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा।
समिति के सदस्यों में निम्न शामिल होंगे:-
1. मुख्यमंत्री (जो समिति का अध्यक्ष होगा), 2. विधानसभा अध्यक्ष, 3. गृहमंत्री, 4. विपक्ष के नेता।
विधान परिषद के होने की स्थिति में सभापति व विपक्ष के नेता भी शामिल होगें।
अध्यक्षो की योग्यता: - राज. उच्च न्यायालय का सेवानिवृत न्यायाधीश।
सदस्यों की योग्यता:- 1. राज० उच्च न्यायालय का सेवानिवृत/ कार्यरत न्यायधीश।
या
जिसे जिला न्यायालय में 7 वर्ष का अनुभव हो।
2. ऐसा व्यक्ति जिसे मानवाधिकारो में विशेषता, ज्ञान या अनुभव हो।
कार्यकाल :- 3yr या 70 वर्ष (मानवाधिकार संरक्षण संशोधन विधेयक 2019 के पश्चात से)
नोट:- अध्यक्ष व सदस्यों की पुनर्नियुक्ति का प्रावधान है।
हटाने के तरीके:- कदाचार, अक्षमता, दिवालियापन शारिरिक दुर्बलता, नैतिक पतन के आधार पर उच्चतम न्यायालय द्वारा की गयी जांच के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा समय से पूर्व हटाया जा सकता है।
आयोग वार्षिक प्रतिवेदन राज्य सरकार को सौपेगा व राज्य सरकार विधानसभा में इसे रखती है।
राज्य सरकार को विधानसभा में इसकी सिफारिशे अस्वीकार करने का कारण बताना पड़ता है।
शिकायत 8 वीं अनुसूची में शामिल किसी भी भाषा में की जा सकती है। शिकायत हेतु फीस का प्रावधान नहीं है। शिकायत ई-मेल / फैक्स द्वारा भी की जा सकती है।
कार्य व शक्तियाँ:-
• स्वप्रेरणा या पीडित व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत याचिका पर मानवाधिकार उल्लंघन की जांच करना।
• राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन जेल या अन्य संस्थानों का निरीक्षण करना।
• मानवाधिकार उल्लंघन के संबंधित मामलो मे न्यायालय की अनुमति से हस्तक्षेप करना।
• आयोग द्वारा "मानवाधिकार संदेश" समाचार पत्र का प्रकाशन किया जाता है।
• आयोग द्वारा 2002 में "जयपुर घोषणा" मानवाधिकारों के प्रचार प्रसार हेतु की गई है।
• आयोग को सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त है। जिसके द्वारा गवाह को सम्मन जारी कर सकता है व किसी भी न्यायालय या कार्यालय से विभिन्न दस्तावेजो की प्रतिलिपी मांग सकता है।
समिति के सदस्यों में निम्न शामिल होंगे:-
1. मुख्यमंत्री (जो समिति का अध्यक्ष होगा), 2. विधानसभा अध्यक्ष, 3. गृहमंत्री, 4. विपक्ष के नेता।
विधान परिषद के होने की स्थिति में सभापति व विपक्ष के नेता भी शामिल होगें।
अध्यक्षो की योग्यता: - राज. उच्च न्यायालय का सेवानिवृत न्यायाधीश।
सदस्यों की योग्यता:- 1. राज० उच्च न्यायालय का सेवानिवृत/ कार्यरत न्यायधीश।
या
जिसे जिला न्यायालय में 7 वर्ष का अनुभव हो।
2. ऐसा व्यक्ति जिसे मानवाधिकारो में विशेषता, ज्ञान या अनुभव हो।
कार्यकाल :- 3yr या 70 वर्ष (मानवाधिकार संरक्षण संशोधन विधेयक 2019 के पश्चात से)
नोट:- अध्यक्ष व सदस्यों की पुनर्नियुक्ति का प्रावधान है।
हटाने के तरीके:- कदाचार, अक्षमता, दिवालियापन शारिरिक दुर्बलता, नैतिक पतन के आधार पर उच्चतम न्यायालय द्वारा की गयी जांच के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा समय से पूर्व हटाया जा सकता है।
आयोग वार्षिक प्रतिवेदन राज्य सरकार को सौपेगा व राज्य सरकार विधानसभा में इसे रखती है।
राज्य सरकार को विधानसभा में इसकी सिफारिशे अस्वीकार करने का कारण बताना पड़ता है।
शिकायत 8 वीं अनुसूची में शामिल किसी भी भाषा में की जा सकती है। शिकायत हेतु फीस का प्रावधान नहीं है। शिकायत ई-मेल / फैक्स द्वारा भी की जा सकती है।
कार्य व शक्तियाँ:-
• स्वप्रेरणा या पीडित व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत याचिका पर मानवाधिकार उल्लंघन की जांच करना।
• राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन जेल या अन्य संस्थानों का निरीक्षण करना।
• मानवाधिकार उल्लंघन के संबंधित मामलो मे न्यायालय की अनुमति से हस्तक्षेप करना।
• आयोग द्वारा "मानवाधिकार संदेश" समाचार पत्र का प्रकाशन किया जाता है।
• आयोग द्वारा 2002 में "जयपुर घोषणा" मानवाधिकारों के प्रचार प्रसार हेतु की गई है।
• आयोग को सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त है। जिसके द्वारा गवाह को सम्मन जारी कर सकता है व किसी भी न्यायालय या कार्यालय से विभिन्न दस्तावेजो की प्रतिलिपी मांग सकता है।
आयोग निम्न शिकायतों पर कार्यवाही नहीं करता है:-
• 1 वर्ष से पुराने मामले।
• न्यायालय में लंबित मामले।
• अस्पष्ठ शिकायतों पर।
• सेना सम्बन्धी शिकायतें।
• लोक सेवक सम्बन्धी शिकायतें।
• कार्य क्षेत्राधिकार के बाहर के मामलों पर।
महत्वपूर्ण धाराएं:-
धारा 21 - आयोग के गठन सम्बन्धी।
धारा 22 - नियुक्ति सम्बन्धी।
धारा 23 - इस्तीफा व हटाने की प्रक्रिया सम्बन्धी।
धारा 24 - कार्यकाल सम्बन्धी।
धारा 25 - आयोग के सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति सम्बन्धी।
धारा 28 - वार्षिक प्रतिवेदन सम्बन्धी।
महत्वपूर्ण तथ्य:-
• प्रथम अध्यक्ष - कांता भटनागर।
• अध्यक्ष के रूप में न्यूनतम कार्यकाल - कांता भटनागर।
• सदस्य के रूप में सर्वाधिक कार्यकाल - पुखराज सीरवी (7 वर्ष)।
• सदस्य के रूप में न्यूनतम कार्यकाल - नमोनारायण मीणा (1 वर्ष)।
• पूर्व केंद्रीय मंत्री जो मानवधिकार आयोग के सदस्य रहे है - नमोनारायण मीणा।
• उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जो आयोग के अध्यक्ष रहे? - जस्टिस एस सगीर अहमद।
• मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जो आयोग के अध्यक्ष रहे है:- 1. जस्टिस कांता भटनागर। 2. जस्टिस एन. के. जैन।
• राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जो आयोग के अध्यक्ष रहे? - जस्टिस प्रकाश टांटिया।
• 1 वर्ष से पुराने मामले।
• न्यायालय में लंबित मामले।
• अस्पष्ठ शिकायतों पर।
• सेना सम्बन्धी शिकायतें।
• लोक सेवक सम्बन्धी शिकायतें।
• कार्य क्षेत्राधिकार के बाहर के मामलों पर।
महत्वपूर्ण धाराएं:-
धारा 21 - आयोग के गठन सम्बन्धी।
धारा 22 - नियुक्ति सम्बन्धी।
धारा 23 - इस्तीफा व हटाने की प्रक्रिया सम्बन्धी।
धारा 24 - कार्यकाल सम्बन्धी।
धारा 25 - आयोग के सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति सम्बन्धी।
धारा 28 - वार्षिक प्रतिवेदन सम्बन्धी।
महत्वपूर्ण तथ्य:-
• प्रथम अध्यक्ष - कांता भटनागर।
• अध्यक्ष के रूप में न्यूनतम कार्यकाल - कांता भटनागर।
• सदस्य के रूप में सर्वाधिक कार्यकाल - पुखराज सीरवी (7 वर्ष)।
• सदस्य के रूप में न्यूनतम कार्यकाल - नमोनारायण मीणा (1 वर्ष)।
• पूर्व केंद्रीय मंत्री जो मानवधिकार आयोग के सदस्य रहे है - नमोनारायण मीणा।
• उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जो आयोग के अध्यक्ष रहे? - जस्टिस एस सगीर अहमद।
• मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जो आयोग के अध्यक्ष रहे है:- 1. जस्टिस कांता भटनागर। 2. जस्टिस एन. के. जैन।
• राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जो आयोग के अध्यक्ष रहे? - जस्टिस प्रकाश टांटिया।
