चर्चा में क्यों?
देश के चर्चित दिल्ली मुम्बई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के प्रथम फेज सोहना (हरियाणा) से दौसा जिले के बड़ का पाड़ा तक 228 किमी का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 फरवरी 2023 को करेंगे। दिल्ली-लालसोट खंड की लंबाई 247 किमी है। जिसकी लागत 12173 करोड़ रुपये है।
प्रमुख बिन्दु:-
• यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली-फरीदाबाद-सोहना खंड के गलियारे (कॉरिडोर) के साथ-साथ जेवर एयरपोर्ट और मुंबई में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट को जोड़ेगा।
• इस दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की दिनांक 9 मार्च 2019 को आधारशिला रखी गयी थी।
• कुल लंबाई - 1382 किमी।
• लागत - 1 लाख करोड़।
• वाहनों की गति :- 120 किमी।
• 5 राज्यो व 1 केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र) से गुजरेगा।
• यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली से 9 किलोमीटर, हरियाणा से 160 किमी. , राजस्थान से 374 किमी., मध्यप्रदेश से 245 किमी., गुजरात से 423 किमी., महाराष्ट्र से 171 किमी. गुजरेगा।
• राजस्थान के 7 जिलों (अलवर, भरतपुर, दौसा, सवाईमाधोपुर, टोंक, बूंदी, कोटा) से गुजरेगा।
• दिल्ली से मुम्बई जाने में 12 घंटे का समय लगेगा एवं दूरी लगभग 130 किमी कम हो जाएगी।
• वर्तमान में 8 लेन का बन रहा है। भविष्य में इसे 12 लेन का किया जायेगा।
• यह देश का पहला आठ लेन का एक्सेस कंट्रोल ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे होगा।
• यह जर्मन तकनीक से बनाया गया है।
• यह एशिया का पहला व दुनिया का दूसरा एक्सप्रेस-वे होगा जिसमें वन्यजीवों की आवाजाही की सुविधा के लिए पशु हवाई पुल (ओवरपास) की सुविधा होगी।
• डीएमई में 3 वन्य जीव और 5 हवाई पुल (ओवरपास) होंगे जिनकी संयुक्त लंबाई 7 किमी होगी।
• दो आठ लेन की सुरंग भी होगी। इनमें से पहली मुकुंदरा अभयारण्य के नीचे से चार किलोमीटर लंबी बनाई जा रही है। दूसरी सुरंग माथेरान पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (इको सेंसिटिव जोन) में भी चार किलोमीटर लंबी सुरंग होगी।
• एक्सप्रेस-वे पर जल संचयन हेतु प्रत्येक 500 मीटर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम होगा।
• दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे (Delhi Mumbai Expressway) का निर्माण एवं रखरखाव NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) द्वारा किया जायेगा।
• इस एक्सप्रेस वे से 32 करोड़ लीटर से अधिक के वार्षिक ईंधन की बचत होगी और कार्बन डाई ऑक्साईड (CO2) उत्सर्जन में 85 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी जो कि 4 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
• पर्यावरण संरक्षण के प्रति राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की प्रतिबद्धता के तहत राजमार्ग के किनारे 40 लाख से अधिक वृक्ष और झाड़ियाँ लगाने की योजना है।
• इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण में 12 लाख टन से अधिक स्टील की खपत होगी, जो 50 हावड़ा पुलों के निर्माण के बराबर है।
• इस परियोजना के लिए 80 लाख टन सीमेंट की खपत होगी जो भारत की वार्षिक सीमेंट उत्पादन क्षमता का लगभग 2 प्रतिशत है।
• दिल्ली-वडोदरा खंड के लिए स्थायी फुटपाथ डिजाइन को अपनाया गया है, जो शुष्क क्षेत्रों से गुजरता है तथा परियोजना की दीर्घायु बढ़ाने के लिए उच्च वर्षा वाले वडोदरा-मुंबई खंड के लिए कठोर फुटपाथ डिजाइन को अपनाया गया।
